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कृषि महाविद्यालय में जैव विविधता आधारित दो दिवसीय जिला स्तरीय प्रशिक्षण का हुआ समापन।

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कृषि महाविद्यालय में जैव विविधता आधारित दो दिवसीय जिला स्तरीय प्रशिक्षण का हुआ समापन।

भारतीय कृषि प्रणाली अनुसंधान संस्थान, मोदीपुरम (मेरठ) उत्तर प्रदेश द्वारा वित्तपोषित परियोजना के अंतर्गत कृषि महाविद्यालय के सभाकक्ष में जैव विविधता पर आधारित दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल एवं प्रभावशाली आयोजन किया गया। यह प्रशिक्षण 23–24 तथा 25–26 फरवरी 2026 को किसानों, कृषि विभाग के अधिकारियों, कर्मचारियों एवं इनपुट डीलर्स के लिए आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक स्वागत-वंदन से हुआ। इस अवसर पर जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय से आमंत्रित परियोजना की प्रमुख एवं सस्य विभागाध्यक्ष डॉ. नम्रता जैन का पुष्पगुच्छ भेंट कर आत्मीय स्वागत किया गया। साथ ही विषय विशेषज्ञ के रूप में पधारे वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. एस. बी. अग्रवाल का भी सम्मानपूर्वक अभिनंदन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कृषि महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. घनश्याम देशमुख एवं वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. एन. के. बिसेन द्वारा संयुक्त रूप से की गई। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में उन्होंने कहा कि जैव विविधता आधारित कृषि प्रणाली वर्तमान समय में पर्यावरण संरक्षण, मृदा स्वास्थ्य सुधार एवं किसानों की आय वृद्धि के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। डॉ. नम्रता जैन ने कहा कि वर्तमान समय में जैव विविधता का संरक्षण कृषि की स्थिरता एवं खाद्य सुरक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने विविध फसल प्रणाली, प्राकृतिक संसाधनों के समुचित प्रबंधन एवं जैविक पद्धतियों के समावेशन पर बल दिया। वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. एस. बी. अग्रवाल ने वैज्ञानिक दृष्टिकोण से जैव विविधता आधारित कृषि प्रणाली की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इससे उत्पादन लागत में कमी, मृदा स्वास्थ्य में सुधार तथा पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलता है। परियोजना के जिला समन्वयक डॉ. अतुल श्रीवास्तव ने बताया कि यह परियोजना विशेष रूप से बालाघाट जिले में प्रभावी रूप से क्रियान्वित की जा रही है। उन्होंने कहा कि बालाघाट जिले में फसल जैव विविधता को बढ़ावा देने के लिए बहुफसली प्रणाली, देशी बीजों के संरक्षण, दलहनी-तिलहनी फसलों के समावेशन तथा कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रमों का सफल संचालन किया जा रहा है। प्रशिक्षण सत्रों में डॉ. शैलेंद्र भलावे, डॉ एस आर धुवारे (कृषि विज्ञान केंद् ,बड़गाव समन्वयक ) डॉ ऋषिकेश ठाकुर, डॉ. सुरेंद्र राय, डॉ. उत्तम बिसेन, डॉ शैलेन्द्र भलावे,डॉ. राजू पानसे, ,डॉ. विक्रम सिंह गौर ने जैव विविधता के विभिन्न पहलुओं पर विस्तारपूर्वक व्याख्यान प्रस्तुत किए। उन्होंने फसल विविधीकरण, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, एकीकृत कीट प्रबंधन एवं जैविक उपायों के माध्यम से सतत कृषि प्रणाली को मजबूत करने पर बल दिया। उन्होंने आगे बताया कि कृषि विभाग के अधिकारियों एवं इनपुट डीलर्स के सहयोग से जिले में जैव विविधता आधारित मॉडल प्लॉट स्थापित किए गए हैं, जो अन्य किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बन रहे हैं। यह दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम ज्ञानवर्धन, अनुभव साझा करने एवं समन्वित प्रयासों का सशक्त मंच सिद्ध हुआ। कार्यक्रम ने जैव विविधता संरक्षण एवं सतत कृषि विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण और प्रेरणादायी पहल के रूप में अपनी सार्थक भूमिका निभाई।

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