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कटनी के टिकरिया में 600 करोड़ से अधिक के अवैध खनन का आरोप, राज्य को भारी राजस्व नुकसान कटनी (म.प्र.) – जिले के तहसील मुड़वारा अंतर्गत ग्राम टिकरिया में बड़े पैमाने पर अवैध खनन का गंभीर मामला सामने आया है। जनहित में की गई एक शिकायत में आरोप लगाया गया है कि क्षेत्र में बॉक्साइट, लेटराइट एवं फायर क्ले जैसे खनिजों का सुनियोजित और निरंतर अवैध उत्खनन किया जा रहा है, जिससे राज्य सरकार को सैकड़ों करोड़ रुपये का राजस्व नुकसान हुआ है। शिकायत के अनुसार, ग्राम टिकरिया में खनन पट्टाधारी शंकरलाल विश्वकर्मा एवं पूरनलाल विश्वकर्मा द्वारा स्वीकृत खनन पट्टों, पर्यावरण स्वीकृतियों तथा निर्धारित उत्पादन क्षमता की खुलेआम अवहेलना की गई। शंकरलाल विश्वकर्मा को 27.02 हेक्टेयर क्षेत्र में अधिकतम 7 लाख टन प्रतिवर्ष उत्पादन की अनुमति थी, जबकि उनकी पर्यावरणीय स्वीकृति के अनुसार वास्तविक अनुमेय उत्पादन मात्र 1 लाख टन प्रतिवर्ष था। वहीं पूरनलाल विश्वकर्मा को 4.69 हेक्टेयर क्षेत्र के लिए अलग पट्टा स्वीकृत था। आरोप है कि दोनों पट्टाधारकों ने स्वीकृत सीमाओं और मात्रा से कई गुना अधिक खनिजों का उत्खनन किया। एक सतर्क आकलन के अनुसार, पर्यावरणीय स्वीकृति की तिथि से अब तक शंकरलाल विश्वकर्मा द्वारा लगभग 32.60 लाख मीट्रिक टन तथा पूरनलाल विश्वकर्मा द्वारा 17.80 लाख मीट्रिक टन खनिजों का अवैध उत्खनन किया गया। कुल अवैध खनन लगभग 50.40 लाख मीट्रिक टन आंका गया है। यदि खनिजों की न्यूनतम एक्स-माइन कीमत ₹1200 से ₹1500 प्रति मीट्रिक टन मानी जाए, तो अवैध खनन का कुल मूल्य 600 करोड़ रुपये से अधिक बैठता है। इसमें रॉयल्टी, डीएमएफ, एनएमईटी, जुर्माना एवं पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति शामिल नहीं है। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि अवैध खनन को छिपाने के लिए खनन गड्ढों को ओवरबर्डन से भर दिया गया तथा भू-आकृति में बदलाव कर भौतिक साक्ष्यों को नष्ट करने का प्रयास किया गया। विशेषज्ञों के अनुसार, खनन पट्टे की सीमा या अनुमेय मात्रा से बाहर किया गया उत्खनन MMDR अधिनियम, 1957 की धारा 4(1) के तहत सीधे तौर पर अवैध खनन की श्रेणी में आता है। शिकायतकर्ता ने खनिज विभाग से मांग की है कि तत्काल जीपीएस/जीआईएस आधारित सीमांकन कराकर विस्तृत जांच कराई जाए, चल रहे खनन कार्य को निलंबित किया जाए, वर्षवार अवैध उत्खनन की मात्रा निर्धारित की जाए तथा अवैध रूप से निकाले गए खनिजों के 100 प्रतिशत मूल्य की वसूली की जाए। साथ ही संबंधित खनन पट्टों को निरस्त करने और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की भी मांग की गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए यह प्रकरण न केवल खनन नियमों के उल्लंघन का, बल्कि पर्यावरणीय क्षति और सरकारी राजस्व की बड़े पैमाने पर हानि का भी संकेत देता है। अब निगाहें खनिज विभाग की कार्रवाई पर टिकी हैं।