सिंगरौली रेत खनन पर सियासी संग्राम भाजपा नेता ने लगाए भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप।
रॉयल्टी चोरी से लेकर अफसरों की मिलीभगत तक पूरे तंत्र पर उठे गंभीर सवाल।
दैनिक पंचायती राज सूरज सिंह।

सिंगरौली 22 जनवरी 2026
जिले में रेत खनन का मुद्दा अब एक बड़े विवाद का रूप ले चुका है। पूर्व नगर निगम अध्यक्ष और भाजपा नेता वीरेंद्र कुमार मिश्रा ने मेसर्स सहकार ग्लोबल लिमिटेड के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए प्रशासन और कंपनी के गठजोड़ पर तीखे सवाल दागे हैं। वहीं अवैध रेत उत्खनन, करोड़ों रुपये की रॉयल्टी चोरी और खनिज विभाग के अधिकारियों से कथित मिलीभगत के बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। यह मामला सामने आने के बाद न केवल प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है, बल्कि आम जनता में भी गहरा आक्रोश देखने को मिल रहा है। वहीं वीरेंद्र कुमार मिश्रा ने कलेक्टर सिंगरौली को सौंपे गए विस्तृत शिकायती पत्र में आरोप लगाया है कि जिले की नदियों और रेत घाटों पर संचालित खदानों में नियम-कानून को पूरी तरह ताक पर रख दिया गया है।

पर्यावरणीय स्वीकृति और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से प्राप्त अनुमति की शर्तों का खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है। खदान क्षेत्रों का न तो विधिवत सीमांकन कराया गया है और न ही निर्धारित सीमा स्तंभ लगाए गए हैं, जिससे खदान क्षेत्र से बाहर तक अवैध उत्खनन बेरोकटोक जारी है। इसका सीधा नुकसान शासन को हो रहा है और राजस्व को करोड़ों रुपये की चपत लग रही है। भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि सहकार ग्लोबल द्वारा भारी मशीनों के जरिए नदी के भीतर से रेत छानकर निकाली जा रही है। इससे नदियों का प्राकृतिक प्रवाह बाधित हो रहा है और पर्यावरणीय संतुलन बुरी तरह बिगड़ चुका है। जलीय जीव-जंतुओं के अस्तित्व पर संकट मंडरा रहा है, वहीं नदी का पानी दूषित होने से आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। श्री मिश्रा ने कहा कि यह केवल अवैध खनन का मामला नहीं है, बल्कि यह नदियों, पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के साथ सीधा खिलवाड़ है।
*मुनाफे की अंधी दौड़*
मामले को और गंभीर बनाते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि खनन अनुबंध के तहत स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों, स्वास्थ्य संस्थानों और ग्रामीण विकास के लिए निर्धारित सीएसआर (कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी) की राशि को भी ठेकेदार द्वारा खर्च नहीं किया जा रहा है। कागजों में विकास दिखाया जा रहा है, जबकि जमीनी हकीकत शून्य है। इससे साफ है कि मुनाफे की अंधी दौड़ में सामाजिक जिम्मेदारियों को भी पूरी तरह नजरअंदाज किया गया है। भाजपा नेता ने हर्दी क्षेत्र का उदाहरण देते हुए कहा कि पीडब्ल्यूडी पुल के नीचे बड़े पैमाने पर अवैध रेत उत्खनन किया गया है, जिससे पुल में दरारें पड़ने की जानकारी सामने आई है। यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगी तो किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता। यह लापरवाही सीधे-सीधे आम जनता की जान से खेलने के बराबर है।
*खनिज अधिकारी लेती है मोटी रकम*
सबसे चौंकाने वाला आरोप यह है कि सहकार ग्लोबल के मैनेजर और सुपरवाइजर कथित तौर पर यह दावा कर रहे हैं कि खनिज विभाग के अधिकारियों को हर माह मोटी रकम दी जाती है। इस कथन ने पूरे मामले को महज अवैध खनन से आगे बढ़ाकर एक संगठित भ्रष्टाचार के बड़े जाल की ओर इशारा कर दिया है। यदि इन आरोपों की निष्पक्ष और ईमानदार जांच होती है, तो कई बड़े चेहरे बेनकाब हो सकते हैं।
वहीं मिश्रा ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने समय रहते अवैध रेत खनन पर सख्त कार्रवाई नहीं की, तो जिले में जनआक्रोश भड़क सकता है। उन्होंने कलेक्टर से मांग की है कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और दोषियों पर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए। अब निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं कि वह इन संगीन आरोपों को कितनी गंभीरता से लेता है या फिर यह मामला भी फाइलों में दफन होकर रह जाएगा।
*इनका क्या कहना है*
आरोप लगाने से थोड़ी कुछ होता है। क्या मिश्रा जी गाड़ी चलवा रहे हैं कि उनको रॉयल्टी की जानकारी है। ऐसे आरोप लगाने से कुछ नहीं होता है।
आकांक्षा पटेल खनिज अधिकारी सिंगरौली




