कागजों में खड़ा आंगनवाड़ी भवन ज़मीन पर भ्रष्टाचार की नींव सिंगरौली।
दैनिक पंचायती राज सूरज सिंह।

सिंगरौली 22 जनवरी 2026
मध्यप्रदेश सरकार ग्रामीण अंचलों में बच्चों और गर्भवती महिलाओं के पोषण व स्वास्थ्य के लिए योजनाओं पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि इन योजनाओं को भ्रष्टाचार की दीमक भीतर ही भीतर खोखला कर रही है। सिंगरौली जिले के चितरंगी ब्लॉक अंतर्गत ग्राम पंचायत गेरुई के बगड़ेवा टोले का मामला इसका जीता-जागता उदाहरण बनकर सामने आया है।
वर्ष 2021 में जिस आंगनवाड़ी भवन को बच्चों के भविष्य की नींव बनना था, वह आज भी केवल सरकारी फाइलों और भुगतान रजिस्टरों में ही खड़ा नजर आता है। भवन निर्माण के लिए शासन द्वारा 7 लाख 80 हजार रुपये की स्वीकृति दी गई थी। सरकारी रिकॉर्ड यह भी बताते हैं कि अब तक 2 लाख 75 हजार 972 रुपये की राशि का भुगतान हो चुका है। लेकिन जब मौके पर जाकर देखा गया, तो सच्चाई चौंकाने वाली है—जहाँ आंगनवाड़ी भवन होना चाहिए, वहाँ आज भी सूनापन पसरा है।
निर्माण शून्य, भुगतान पूरा?

धरातल पर न नींव है, न दीवार और न ही छत की कोई आहट। निर्माण के नाम पर एक ईंट तक नहीं रखी गई, फिर सवाल उठता है कि आखिर लाखों रुपये गए कहाँ? क्या बिना किसी भौतिक सत्यापन के ही सरकारी खजाने से राशि निकाल ली गई?
कागजी प्रगति, असली साजिश
ग्रामीणों का आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारियों और पंचायत स्तर के कर्मचारियों ने आपसी मिलीभगत कर फर्जी मस्टर रोल और प्रगति रिपोर्ट तैयार की, जिसके आधार पर भुगतान करा लिया गया। ₹2.75 लाख से अधिक की राशि का इस तरह निकल जाना साफ इशारा करता है कि यह किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि संगठित सांठगांठ की कहानी है—जिसमें जनप्रतिनिधि, सचिव और तकनीकी अमला सवालों के घेरे में हैं।
अधिकारियों की चुप्पी, संदेह गहराता
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब भवन बना ही नहीं, तो संबंधित विभाग के अधिकारी अब तक मौन क्यों हैं? क्या निरीक्षण सिर्फ कागजों में होते रहे? क्या जानबूझकर आंखें मूंदी गईं? प्रशासन की यह चुप्पी भ्रष्टाचार को मूक सहमति देने जैसी प्रतीत होती है।
नन्हें बच्चों के हक पर डाका
भवन के अभाव में छोटे-छोटे बच्चे आज भी जर्जर कमरों या खुले आसमान के नीचे बैठने को मजबूर हैं। जिन योजनाओं का उद्देश्य बच्चों को सुरक्षित वातावरण देना था, वही योजनाएं भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गईं।
जनता में आक्रोश
ग्राम पंचायत के लोगों में इस घोटाले को लेकर भारी आक्रोश है। ग्रामीण उच्चस्तरीय जांच, दोषियों पर सख्त कार्रवाई और निकाली गई राशि की रिकवरी की मांग कर रहे हैं।
अब सवाल यह नहीं कि घोटाला हुआ या नहीं—सवाल यह है कि सिंगरौली जिला प्रशासन इस खुलासे के बाद क्या करता है?
क्या दोषियों से एक-एक रुपया वसूला जाएगा और उन्हें सलाखों के पीछे भेजा जाएगा, या फिर यह मामला भी अन्य फाइलों की तरह ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा?




